

जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव में हजारों मरीजों का उपचार — 500 से अधिक डॉक्टरों की टीम ने दी सेवाएं
डिण्डौरी।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन डिंडौरी द्वारा जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार हेतु ग्राम पंचायत बरगांव, विकासखंड शहपुरा स्थित जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव में बृहद जनकल्याणकारी एवं विशाल मेगा स्वास्थ्य शिविर का भव्य आयोजन किया गया।
यह अब तक का सबसे बड़ा स्वास्थ्य एवं दिव्यांग जन शिविर रहा, जिसमें हजारों नागरिकों ने पंजीकरण कराया और व्यापक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाया।
जनजातीय समाज के स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
इस शिविर का उद्देश्य सुदूर अंचलों में निवासरत बैगा, गोंड, भरिया एवं सहरिया जनजातियों को एक ही स्थान पर सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएँ, दिव्यांग सहायता एवं शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम में “स्वस्थ जनजाति – समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को साकार करने की दिशा में प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया।
डॉक्टर पुष्पराज पटेल बोले — “शिविर से गरीब और पिछड़े वर्ग को मिलती है जीवनदायी सुविधा”
जबलपुर के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज पटेल ने कहा – “जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव में लगभग 10 वर्षों से हर वर्ष इस तरह का विशाल स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाता है। मुझे यहाँ सेवा देते हुए लगभग पाँच वर्ष हो गए हैं। इस शिविर के आयोजन से गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलती हैं। यहाँ न केवल बीमारियों का पता लगाया जाता है, बल्कि सही तरीके से उपचार और बाद में फॉलोअप भी किया जाता है। वहीं, जबलपुर और अन्य शहरों के अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज का लाभ दिलाने का कार्य भी किया जाता है। आज यहाँ दिव्यांगजनों को उपकरण वितरण से बहुत लाभ पहुँचा है।”
पूर्व निशक्तजन आयुक्त संदीप रजक ने की आयोजन की सराहना
मध्यप्रदेश शासन के नि:शक्तजन कल्याण विभाग के पूर्व आयुक्त संदीप रजक ने कहा — “जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव ऐसा प्रकल्प है, जो पीड़ित मानवता की सेवा के लिए कई वर्षों से सतत कार्यरत है। यहाँ आयोजित विशाल मेगा स्वास्थ्य शिविर में हजारों मरीजों की जांच और उपचार किया गया। लगभग 500 डॉक्टरों की टीम ने अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। जिन मरीजों को सर्जरी की आवश्यकता थी, उनका पंजीयन कर उन्हें संबद्ध अस्पतालों में बुलाया गया है। यहाँ डॉक्टर केवल उपचार ही नहीं करते, बल्कि उसका फॉलोअप भी लेते हैं। दिव्यांगजन की सुविधा के लिए मोबाइल कोर्ट भी संचालित की गई, जहाँ पंजीयन और उपकरण वितरण किया गया। इस आयोजन की सफलता महाकौशल बरगांव की टीमवर्क और प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।”
9,000 पंजीकरण, 7,300 स्वास्थ्य परीक्षण, 1,816 उपकरण वितरित
शिविर में लगभग 9,000 नागरिकों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 7,300 का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इसके अलावा 482 दिव्यांगजन को चिन्हित कर 1,816 सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।
आयुष विभाग के अंतर्गत 2,195 मरीजों को आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक उपचार उपलब्ध कराया गया।
जबलपुर, रीवा, शहडोल और अन्य जिलों से पहुँचे विशेषज्ञ चिकित्सक
इस आयोजन में जबलपुर, रीवा, शहडोल, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी और बालाघाट जिलों से चिकित्सक दल शामिल हुए।
गोल्डन हॉस्पिटल, गैलेक्सी हॉस्पिटल, ओमेगा, मेट्रो, नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज एवं आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी जबलपुर के चिकित्सकों सहित कुल 252 डॉक्टर एवं 714 पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी सेवाएँ दीं।
मोबाइल कोर्ट, प्रदर्शनी और सामाजिक संदेशों से समृद्ध रहा आयोजन
शिविर में मोबाइल दिव्यांग कोर्ट के माध्यम से दिव्यांग हितग्राहियों के आवेदन का त्वरित निराकरण किया गया।
विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई गई, जिससे नागरिकों को शासन की योजनाओं की जानकारी और लाभ मिला।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों द्वारा “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशा मुक्ति, एवं मोबाइल की लत से मुक्ति” पर आधारित नृत्य नाटिकाएँ प्रस्तुत की गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने सराहा।
अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ सफल समापन
शिविर में डॉ. अजय खेमरिया (निशक्तजन आयुक्त), आरती खरे (उप संचालक, भोपाल), पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह,
सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, एसडीएम शहपुरा ऐश्वर्या वर्मा,
सामाजिक न्याय विभाग के श्याम सिंगोर, जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव अध्यक्ष मनोहर लाल साहू, सचिव अनिल वाजपेयी सहित सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
“स्वस्थ जनजाति – समृद्ध प्रदेश” की दिशा में मील का पत्थर
यह विशाल स्वास्थ्य शिविर डिंडौरी जिले के स्वास्थ्य इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया।
इस आयोजन ने न केवल जनजातीय समाज के स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दिया, बल्कि सेवा, समर्पण और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल भी पेश की।




