
भ्रष्टाचार के आरोप में मनरेगा संविदा अधिकारी बजाग अशोक कुड़ापे की सेवा समाप्त, सीईओ जिला पंचायत डिण्डौरी की सख्त कार्रवाई

डिण्डौरी।
जिला पंचायत डिण्डौरी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में संविदा पद पर कार्यरत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी बजाग अशोक कुड़ापे को गंभीर भ्रष्टाचार, नैतिक पतन और अनुशासनहीनता के आरोप सिद्ध होने पर तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया है।
शिकायत का मामला
ग्राम गाडासरई निवासी केशव राय ने 1 अगस्त 2025 को जिला पंचायत कार्यालय में लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत शोभापुर, जनपद पंचायत बजाग में वर्ष 2023-24 के अंतर्गत नानबाई टोला (बर के पेड़ के पास) पुलिया निर्माण कार्य (वर्क आईडी: 1745004026 / RC 22012034654328) के लिए सामग्री आपूर्ति का ऑर्डर राजेश्वर ट्रेडर्स, गाडासरई को दिया गया था। इस कार्य का भुगतान 14 मई 2025 को ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई दे रहा था, लेकिन बाद में जनपद पंचायत की आईडी से इसे हटा दिया गया।
शिकायत के अनुसार, आरोपी अधिकारी अशोक कुड़ापे ने देयक भुगतान के बदले शिकायतकर्ता से अनुचित धनराशि की मांग की। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने भुगतान का स्क्रीनशॉट और बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग (पेन ड्राइव में) साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए।
विभागीय कार्यवाही
शिकायत प्राप्त होने पर जिला पंचायत डिण्डौरी ने 1 अगस्त 2025 को अशोक कुडापे को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया। चार अगस्त को आरोपी ने अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन जांच अधिकारियों ने इसे असंतोषजनक और तथ्यहीन पाया।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन है। साथ ही, मनरेगा के तहत संविदा अधिकारी/कर्मचारियों की सेवा शर्तों एवं दिशा-निर्देश (क्रमांक 1120/NREGS-MP/NR-2/न.क्र.-409/2025, दिनांक 24 जून 2025) का भी उल्लंघन हुआ है।
गंभीर आरोप सिद्ध
जांच में अशोक कुड़ापे पर लगे आरोपों को गंभीर कदाचरण, नैतिक पतन और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में प्रमाणित पाया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी/अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक ने आदेश जारी कर कहा कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना में भ्रष्टाचार अस्वीकार्य है और यह जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात है।
सेवा समाप्ति का आदेश
जारी आदेश में कहा गया कि उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत अशोक कुड़ापे की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि मनरेगा में पदस्थ कोई भी संविदा कर्मचारी या अधिकारी योजना के दिशा-निर्देशों और सेवा शर्तों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम जिला पंचायत प्रशासन द्वारा मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक सख्त संदेश माना जा रहा है।