

पत्रकारिता और रेडियो में ‘चुनौतियां और अवसर’ विषय पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी में हुआ आयोजन
भोपाल।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् स्वर्गीय पुष्पेंद्र पाल सिंह (पीपी सर) की जन्म जयंती पर रविवार को जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी (JLU) में भावनात्मक और ज्ञानवर्धक माहौल देखने को मिला।
देशभर के विद्यार्थियों और पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों ने इस अवसर पर उन्हें याद किया और उनके व्यक्तित्व व योगदान पर चर्चा की।
कार्यक्रम के अंतर्गत “पत्रकारिता और रेडियो में चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर मास्टरक्लास का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय झा (कमोडिटी एडिटर, ज़ी बिज़नेस) और आरजे अनादि उपस्थित रहे। दोनों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए मीडिया के बदलते स्वरूप और नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
“पीपी सर सबके गुरु थे” – प्रो. दिवाकर
जेएलयू के प्रोफेसर दिवाकर ने भावुक शब्दों में कहा,
“कुछ छवियाँ कभी धुंधली नहीं पड़तीं, वे हमें जोड़ती हैं। पुष्पेंद्र पाल सर सबके गुरु थे। उन्हें याद करना, उन्हें फिर से जीना है।”
उन्होंने कहा कि जब वे भोपाल जैसे अनजान शहर में आए थे, तब पीपी सर ने न केवल अकादमिक माहौल समझने में मदद की बल्कि पत्रकारिता के मानवीय पक्ष को भी सिखाया।
“क्लासरूम से बाहर भी सिखाते रहे पीपी सर” – प्रो. विवेक खरे
मुख्य अतिथि एवं प्रो वाइस चांसलर प्रो. विवेक खरे ने कहा,
“पुष्पेंद्र पाल जी की पर्सनैलिटी को केवल देखकर नहीं, बल्कि मिलकर समझा जा सकता है। उन्होंने सिखाया कि आप कितने भी अच्छे शिक्षक हों, लेकिन एक अच्छा इंसान होना सबसे ज़रूरी है। वे हमेशा सकारात्मक रहे और क्लासरूम से बाहर भी विद्यार्थियों को सिखाते रहे।”
“पॉडकास्ट अब मुख्यधारा में, विद्यार्थी अपनी ताकत पहचानें” – आरजे अनादि
मुख्य वक्ता आरजे अनादि ने विद्यार्थियों को रेडियो और पॉडकास्टिंग की बदलती दुनिया से परिचित कराया। उन्होंने कहा,
“रेडियो संवाद का वह माध्यम है जो श्रोता के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखता है। पॉडकास्ट उसी का नया रूप है — जिसमें विस्तार और स्वतंत्रता दोनों हैं। 2004 में शुरू हुआ पॉडकास्ट अब मुख्यधारा में आ चुका है। यह छात्रों के लिए अपनी पहचान बनाने का स्वर्ण अवसर है।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पहले अपनी रुचि तय करनी चाहिए, इससे कंटेंट की दिशा और ऊर्जा दोनों संतुलित रहती हैं। “जब विद्यार्थी कठिनाइयों की धूप में आते हैं, तो सर समाधान के बरगद की तरह उन्हें छाँव देते थे।”
“कंटेंट में ह्यूमन और ह्यूमर दोनों ज़रूरी” – मृत्युंजय झा
ज़ी बिज़नेस के कमोडिटी एडिटर मृत्युंजय कुमार झा, जो कभी पुष्पेंद्र पाल सिंह के विद्यार्थी रहे हैं, ने मीडिया में सटीक और जिम्मेदार लेखन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा,
“कंटेंट चाहे 30 सेकंड का हो या 300 शब्दों का, उसमें शार्पनेस और सार दोनों होना चाहिए। यह अभ्यास कॉलेज के समय से ही शुरू करना चाहिए।”
फ़ेक न्यूज़ पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में “कॉमन सेंस” सबसे बड़ा हथियार है।
“जर्नलिज्म की किसी भी विधा में सफलता की शुरुआत लेखन से होती है, और लिखने के लिए पढ़ना ज़रूरी है।”
मंच संचालन और आभार
कार्यक्रम का मंच संचालन तृप्ति शुक्ला ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन रितेश पुरोहित द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पुष्पेंद्र पाल सिंह के शिक्षण, व्यक्तित्व और उनके पत्रकारिता दृष्टिकोण पर अपने अनुभव भी साझा किए।
यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि आने वाली पत्रकार पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मंच भी बना।


