
कंचनपुर ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितता उजागर: सरपंच, सचिव, उपयंत्री और रोजगार सहायक से ₹5.57 लाख की वसूली का आदेश

डिण्डौरी | जिला पंचायत डिण्डौरी द्वारा एक अहम निर्णय लेते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर हुई वित्तीय अनियमितता के मामले में कड़ा कदम उठाया गया है। पंचायत राज एवं स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर के चार जिम्मेदारों से कुल ₹5,57,720/- की राशि वसूली का आदेश पारित किया गया है।
यह कार्रवाई 28 जुलाई 2025 को जारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग डिण्डौरी की जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई, जिसमें निर्माण कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई थी।
वसूली आदेश में सरपंच कृष्ण कुमार ओटिए से ₹2,23,500/-, सचिव लक्ष्मी प्रसाद यादव से ₹2,23,500/-, उपयंत्री श्याम सुंदर सेन से ₹38,934/-, तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक मुकेश बांधवे से ₹71,786/- कुल वसूली योग्य राशि ₹5,57,720/- (पांच लाख सत्तावन हजार सात सौ बीस रुपये मात्र) है।
जारी आदेश के मुताबिक ग्राम पंचायत कंचनपुर सचिव लक्ष्मी प्रसाद यादव,ग्राम रोजगार सहायक मुकेश बांधवे के दोषी सिद्ध होने से उनके विरूद्ध पृथक से अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी । वहीं कृष्ण कुमार ओटिये सरपंच, लल्लू राम झारिया, पंच एवं आरती अग्रवाल पंच के विरुद्ध पृथक से मध्य प्रदेश पंचायतराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत कार्यवाही के लिये प्रकरण दर्ज करने की बात कही है।
जांच में क्या सामने आया?
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि निर्माण सामग्री की खरीद, श्रमिकों के भुगतान एवं विभिन्न योजनाओं की राशि में भारी गड़बड़ी की गई थी। बिना तकनीकी स्वीकृति और माप पुस्तिका के भुगतान कर दिए गए, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग सिद्ध हुआ।
प्रशासन ने क्या कहा?
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत डिंडोरी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि एक माह के भीतर संबंधित व्यक्ति उपरोक्त राशि जमा नहीं करते हैं, तो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत राजस्व वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उपसरपंच विसराम ने बताया, “यह निर्णय ग्रामीण विकास के लिए आने वाली योजनाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है। यदि दोषी अधिकारी जवाबदेह नहीं होंगे तो ग्रामीणों का भरोसा टूट जाएगा।”
वहीं वीरेंद्र तिवारी ने कहा, “इस कार्रवाई से यह संकेत गया है कि अब पंचायतों में भ्रष्टाचार नहीं चलेगा। प्रशासन को हर ग्राम पंचायत की नियमित ऑडिट करनी चाहिए।”
यह मामला पंचायतों में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन की यह कार्रवाई भविष्य में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए एक नजीर बन सकती है।