दिनदहाड़े टीआई ने कराया पेड़ का कत्लेआम, वन संरक्षण अधिनियम को किया दरकिनार

– यातायात थाना प्रभारी की मनमानी पड़ी पर्यावरण पर भारी, नियमों की उड़ाई धज्जियां

डिंडौरी | शासन द्वारा पेड़ों के संरक्षण और उनके अंधाधुंध कटाव को रोकने के लिए स्पष्ट नियम और कानून बनाए गए हैं। वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत किसी भी पेड़ की कटाई या छंटाई के लिए संबंधित विभागों — जैसे कि वन विभाग, नगरीय निकाय, और जिस विभाग की भूमि पर पेड़ स्थित है — से पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन जब कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ने लगें, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

ताजा मामला डिंडौरी जिले के यातायात थाना परिसर का है, यातायात थाना प्रभारी सुभाष उईके ने नियमों की अनदेखी करते हुए थाना परिसर से दूर लगे फलदार कटहल के पेड़ की छंटाई के नाम पर उसका दिनदहाड़े कत्लेआम करवा दिया। मौके से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना परिसर में स्थित कटहल के पेड़ के बड़े-बड़े तनों को बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कटवा दिया गया, जिससे पेड़ कुरूप हो गया है। यह पूरी कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब वसंत ऋतु में फलदार पेड़ों की छंटाई और कटाई पर कानूनी रूप से प्रतिबंध होता है।0एक ओर शासन बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी परिसर में खड़े हरे-भरे पेड़ों को स्वयं सरकारी अधिकारी ही नियमों की धज्जियां उड़ाकर नष्ट कर रहे हैं। थाना प्रभारी की इस मनमानी पर स्थानीय पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने कड़ी आपत्ति जताई है और मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।यह मामला न केवल पेड़ संरक्षण के नियमों की अवहेलना है, बल्कि शासन की पर्यावरणीय नीतियों की विफलता को भी उजागर करता है।

एमपी हाईकोर्ट ने कटहल समेत 62 प्रजाति के पेड़ो को घोषित किया संरक्षित 

मध्यप्रदेश में कटहल (Artocarpus heterophyllus) को संरक्षित पेड़ों की सूची में शामिल किया गया है।  मार्च 2025 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद, वन विभाग ने 62 प्रकार के पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है, जिसमें कटहल भी शामिल है।  अब इन पेड़ों की कटाई या छंटाई बगैर अनुमति अवैध माना जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को कटहल का पेड़ काटना है, चाहे वह निजी या सरकारी भूमि पर हो, तो उसे संबंधित वन विभाग से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है।  अन्यथा, यह वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।

इनका कहना है-

वन विभाग में पेड़ो की कटाई/छंटाई से संबंधित आवेदन मेरी जानकारी में नहीं है, वन विभाग से अनुमति जारी नहीं किया गया है।

पुनीत सोनकर, डीएफओ, डिंडौरी

मैं अभी जिले से बाहर हूँ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को बोलती हूँ।

वाहिनी सिंह पुलिस अधीक्षक डिंडोरी

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