विक्षिप्तों की व्यवस्था करे प्रशासन – एडवोकेट निर्मल कुमार साहू

समाज के शुभचिंतको के लिए,,,,,,,,,,,

डिण्डौरी। जिला डिण्डौरी के विकासखण्ड शहपुरा में कुछ दिनों से 4-5 विक्षिप्त व्यक्ति जिसमें कुछ महिला है और कुछ पुरुष जो शहर व गांव के गलियों में देखने को मिल रहे है,
इनका न कोई धर्म है न जाति बस इनकी यह गलती है कि ये मानसिक रोगी है । जिनका न तो खाने का ठिकाना है न रहने का ।
बस इसी कारण से समाज के शुभचिंतको का चिंतन मनन इनके ओर नही जा रहा है ।
यहां तक की ऐसे विक्षिप्त व्यक्तियों के देख-रेख करने की जिम्मेदारी पुलिस व जिला प्रशासन को दी गई है किंतु  इनका भी रुख संवेदनहीन नजर आ रही है ।
जबकी ऐसे व्यक्तियों के लिए मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 में बना है जिसके अनुसार ऐसे व्यक्तियों के पुनर्वास करने के लिए पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन को जिम्मेदारी दी गई है जिसमें उल्लेख है कि जैसे ही ऐसे व्यक्तियों की सूचना मिलती है तत्काल 24 घंटे के अंदर उनका रेस्क्यू करने के पश्चात स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाए साथ ही ऐसे व्यक्तियों के परिजनों की तलाश की जाए न मिलने पर गुमशुदगी में रिपोर्ट दर्ज कर इन व्यक्तियों के देख-रेख कर पुनर्वास केंद्र पर भेजा जाए ।

किन्तु आज की ताजा खबर यह है कि विकासखंड शहपुरा अंतर्गत ऐसे चार-पांच व्यक्ति लगातार घूम रहे हैं किंतु उनके शुद्ध लेने की जिम्मेदारी ना तो जिला प्रशासन ले रही है और ना ही पुलिस विभाग ।

आज बता दें कि इस संदर्भ में जिला कलेक्टर तहसीलदार, टीआई शहपुरा को भी सूचना दी गई किंतु इनके द्वारा इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया ।

ये उस वक्त का इंतजार कर रहे है जब इनके साथ कोई अमानवीय घटना हो जायेगी तब जिला प्रशासन से लेकर हर कोई टीआरपी बटोरने के लिए अखबारों की सुर्खिया बनेगे ।

सबाल आप सभी से-

1. क्या ऐसे व्यक्तियों के लिए कोई मानव अधिकार नहीं है ?

2. क्या ऐसे व्यक्ति मानव की श्रेणी में नहीं आते इसलिए जिला प्रशासन से लेकर हर कोई अपने जिम्मेदारी से भाग रहा है ?

3. क्या यह सामाजिक मुद्दा नहीं है इसलिए समाज के शुभचिंतकों के द्वारा कोई आंदोलन धरना नहीं किया जाता ?

4. क्या अखबारों की यह टीआरपी नहीं बना बढा पाएगी इसलिए अखबारों में ऐसी खबरें नहीं छपती ।

5. क्या ऐसे व्यक्तियों के मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं ?

जरा आप भी विचार कीजिए और इस पर टिप्पणी कीजिए और सुधार के लिए आगे आइये ।

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