ग्राम पंचायत कंचनपुर में भ्रष्टाचार के खेल पर सवाल ?



सचिव–सरपंच की मिलीभगत से वेंडर घोटाला, न्यायालय आदेश के बाद भी प्रशासन मौन

डिण्डौरी।
ग्राम पंचायत कंचनपुर (जनपद पंचायत शहपुरा) में सचिव लक्ष्मी यादव और सरपंच कृष्ण कुमार ओटियो पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर चल रहा यह खेल किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है, तभी सबूत और न्यायालय के आदेश होने के बावजूद प्रशासन अब तक मौन है।

वेंडर बनाकर खुद को भुगतान

जानकारी के अनुसार सचिव और सरपंच की मिलीभगत से पंचायत में फर्जी वेंडर बनाया गया। इसके तहत ₹3,660 का भुगतान वेनर पोस्ट एवं गिलास खरीद के नाम पर किया गया, जबकि राशि सीधे उनके अपने ही खाते में चली गई।

स्टेशनरी बिल का खेल

यही नहीं, मात्र एक माह में स्टेशनरी के नाम पर लगभग ₹19,000 का बिल एक ही व्यक्ति के नाम से चढ़ाकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया गया।

न्यायालय की रिकवरी आदेश की अनदेखी

इससे पहले जिला न्यायालय द्वारा दोनों पर ₹5,57,000 की रिकवरी तय की जा चुकी है। पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 और 92 के तहत कार्यवाही न्यायालय में चल रही है। बावजूद इसके एक माह बीत जाने पर भी रिकवरी राशि जमा नहीं की गई।

ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीण वीरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है –
“ग्राम पंचायत का पैसा विकास कार्यों में लगना चाहिए, लेकिन यहां सचिव और सरपंच मिलीभगत से जनता के पैसे को अपने खातों में डाल रहे हैं। न्यायालय आदेश होने के बाद भी कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि इन्हें किसी बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त है।”

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने स्पष्ट सबूतों और न्यायालय आदेश के बाद भी जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है और यह चर्चा आम है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

जनहित का सवाल

ग्राम पंचायत स्तर पर चल रहे इस तरह के घोटाले न सिर्फ शासन की योजनाओं को बदनाम कर रहे हैं बल्कि जनता का विश्वास भी डगमगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्यवाही नहीं होगी, तब तक विकास की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।

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