
वरिष्ठ पत्रकार राजेश विश्वकर्मा की कलम से
डिण्डौरी। नगर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की आड में प्रशासनिक महकमे द्वारा जो कार्यवाही की गई,वह निःसंदेह शक के दायरे में है,क्यों की भेदभाव पूर्ण कार्यवाही के चलते यातायात व्यवस्था तो दुरुस्त न हो सकी,किंतु किसी गरीब का आशियां उजाड़ व्यक्ति विशेष को लाभ अवश्य पहुंचाया गया है,और व्यक्ति विशेष ने शीघ्रता से उसी मलबे की सामग्री का उपयोग कर पक्की दीवार खड़ी कर भेदभाव पूर्ण और स्वार्थ में की गई कार्यवाही पर मोहर भी लगा दी है। अब जिम्मेदार बगलें झांक रहे है । लेकिन हम आगे बढ़े उससे पहले प्रभारी राजस्व निरीक्षक मंडल डिण्डौरी जो को सुबखार क्षेत्र के हल्का पटवारी भी है की भूमिका पर यह सवाल वाजिब होगा की आखिर पांडे भोजनालय को जमीदोज करने में इतनी दिलचस्पी क्यों..? जबकि वह कार्यवाही के दौरान मौके पर मौजूद थे,और फिर 15*20 का प्रतिवेदन भी इन्होंने ही तैयार किया था।और यह भी पता था कि रोड का हिस्सा छोड़ आधा भाग परिवहन विभाग की भूमि में था तो आधा व्यक्ति विशेष की भूमि में। बावजूद इसके तहसीलदार को अवगत नहीं कराया की साहब कार्यवाही सिर्फ और सिर्फ परिवहन विभाग वाले क्षेत्र में ही की जानी है। लेकिन वह तो पूरा उजाड़ होने तक तमाशा देखते रहे। जिसका व्यक्ति विशेष ने भरपूर फायदा भी उठाया।
लगभग एक माह पूर्व ही हो गए थे बेदखल ? — अतिक्रमण की कार्यवाही के दरमियान किसी भी तरह की अप्रिय घटना घटित ना हो ,इसके लिए प्रशासन पूरी तरह मौके पर मौजूद होता है और बेदखली की कार्यवाही की जाती है।लेकिन यहां तो कब्जा महज 300 वर्गफीट में से हटाया जाना था, और शेष 300 से 350 फीट में रहकर अपना जीविकोपार्जन किया जा सकता था।लेकिन पांडेय परिवार इसके पहले ही लगभग एक माह पूर्व उक्त स्थल से बेदखल हो चुका था,लेकिन विद्युत व्यवस्था चालू थी जिसे पहले कट किया गया फिर कार्यवाही के दौरान मौके पर पांडेय परिवार से कोई भी नहीं था।
फैसला ऑन द स्पॉट — आमतौर पर जमीनी विवादों का निपटारा करने के लिए सबसे पहले निचली अदालतों का दरवाजा खटखटाया जाता है, और पक्ष – विपक्ष के संतुष्ट ना होने की स्थिति में मामले अक्सर उच्च न्यायालय तक चले जाते है,और इसके लिए वर्षों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। तब जाकर न्याय मिलता है।लेकिन यहां तो कानून व्यवस्था से ऊपर जाकर उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर ” फैसला ऑन द स्पॉट ” लेते हुए सम्पूर्ण कार्यवाही को अंजाम दिया गया ,जैसा कि अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए किया जाता है।एक प्रकार से देखा जाए तो कार्यवाही की कार्यवाही हो गई और व्यक्ति विशेष को वह कब्जा भी नसीब हो गया ,जिसके लिए वह वर्षों से जद्दोजहद कर रहा था। बता दें की अशोक पांडे जो की पांडे भोजनालय के संचालक रहे है विगत 30 – 35 वर्षों से यहां होटल व्यवसाय कर अपना और परिवार का पालन पोषण कर रहे थे।
भ्रमित करने का भी प्रयास — बता दें की जब कार्यवाही हो रही थी, तब हमारे प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे,और वहां लेन – देन संबंधी अफवाहों का बाजार गर्म था, इसी बीच हल्का पटवारी सुबखार ने बताया की जमीदोज किया जा रहा भवन एक स्थानीय कंप्यूटर विक्रेता ने पांच लाख रूपये क्रय किया था, और यही बात उच्च पदों पर बैठे राजस्व अधिकारियों को बताई गई, जब हमने पटवारी के बताए अनुसार कंप्यूटर विक्रेता से चर्चा की तो उन्होने बताया की उनका ऐसा कोई सौदा नहीं हुआ,और उन्हें लेकर भ्रामक खबर फैलाई जा रही है।
मांगा गया है संपत्ति का ब्यौरा — प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिलचस्पी रखने वाले पटवारी महोदय वर्ष 2008 बैच के हैं, और बेहद कम समय में इन्होंने सर्विस में रहते अकूद संपदा एकत्रित की है,क्यों और कैसे ..? इसकी जांच की जानी चाहिए। क्यों की कांग्रेस से आर टी आई प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक पुनीत टंडन ने भी इनकी संपत्ति का ब्योरा विभाग से मांगा है,जो की अब तलक नहीं दिया गया।

