
शहपुरा वन परिक्षेत्र में टाइगर की दस्तक, करौंदी में पंचायत भवन के पीछे खेतों में मिले ताज़ा पगचिह्न
बीती रात दहाड़ने की आवाज़ का दावा, 6 दिनों से इलाके में बाघ की मौजूदगी, वन विभाग की सुस्ती से ग्रामीणों में दहशत
शहपुरा निवासी कमल गुप्ता ने टेकरी पहाड़ी में ली बाघ की तस्वीर
डिण्डौरी | शहपुरा
डिण्डौरी जिले के शहपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम करौंदी से एक बड़ी और बेहद गंभीर खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत भवन के ठीक पीछे खेतों में टाइगर के ताज़ा पगचिह्न मिलने से पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का दावा है कि ये पगचिह्न कुछ ही घंटों पुराने हैं और बीती रात गांव के आसपास बाघ की दहाड़ने की आवाज़ भी सुनी गई थी। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक बाघ की मौजूदगी को लेकर कोई ठोस कार्रवाई या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सोमवार सुबह जब किसान गेहूं की फसल में पानी देने खेतों की ओर पहुंचे, तो उनकी नज़र खेतों में बने बड़े और साफ़ पगचिह्नों पर पड़ी। पगचिह्न ग्राम पंचायत भवन के पीछे से खेतों के भीतर जाते दिखाई दे रहे थे। किसानों ने तुरंत गांव में इसकी सूचना दी, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि पगचिह्न बेहद ताज़ा हैं, जिससे साफ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बाघ कुछ ही समय पहले इसी रास्ते से गुज़रा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बीते छह दिनों से पूरे शहपुरा वन परिक्षेत्र में टाइगर की मौजूदगी बनी हुई है। 14 जनवरी को पहली बार जबलपुर–अमरकंटक नेशनल हाईवे पार करते हुए सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी डॉ सुनील कांत वाजपेयी ने स्वयं बाघ को देखने की बात कही थी। उसी रात बांकी गांव में खेत के पास निर्माणाधीन मकान की रेत पर बैठा हुआ बाघ कृष्णा बनवासी व ग्रामीणों को दिखाई दिया। इसके अगले दिन कंचनपुर गांव में खेत में काम कर रहे किसान प्यारेलाल परस्ते और जयसिंह भवेदी को दिखा। किसानों के सामने अचानक बाघ आ जाने से गांव में दहशत और बढ़ गई।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बावजूद वन विभाग का अमला अब तक बाघ को ट्रेस करने में नाकाम रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर स्तर के अधिकारियों ने शुरुआत में इन सूचनाओं को महज़ अफवाह बताकर टाल दिया और खुद मौके पर जाकर हालात देखने तक नहीं पहुंचे। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराज़गी भी देखी जा रही है।
खेतों में इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है, लेकिन बाघ के डर से किसान खेती-किसानी के काम से दूर रहने को मजबूर हैं। गांव में बच्चों और महिलाओं को घर से बाहर निकलने से मना कर दिया गया है। शाम होते ही गांव में सन्नाटा पसर जाता है और लोग समूह में ही बाहर निकल रहे हैं।
इस बीच शहपुरा निवासी युवक कमल गुप्ता द्वारा ली गई बाघ की एक तस्वीर भी सामने आई है। कमल गुप्ता ने बताया कि वह रात करीब 10:30 बजे गरहट मंदिर की ओर जा रहे थे, तभी शारदा टेकरी के पास अचानक उन्हें बाघ दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल कैमरे से उसकी तस्वीर ली। यह तस्वीर ग्रामीणों के दावों को और भी मजबूत कर रही है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि इलाके में तत्काल गश्त बढ़ाई जाए, ट्रैप कैमरे लगाए जाएं, ड्रोन सर्वे कराया जाए और बाघ की मूवमेंट की आधिकारिक पुष्टि कर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जाएं। शहपुरा वन परिक्षेत्र में बाघ की मौजूदगी अब अफवाह नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आंखों देखी हकीकत बन चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब जागेगा वन विभाग और कब ग्रामीणों को इस डर के साए से राहत मिलेगी?
शासन-प्रशासन को चाहिए कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व या कान्हा नेशनल पार्क से टाइगर एक्सपर्ट की टीम को बुलाया जाए। जिससे इस टाइगर को पकड़ा जा सके।
जिला प्रशासन को चाहिए कि इस ओर कदम उठाते हुए बांधवगढ़ या कान्हा प्रबंधन से बात करके वहां की टीम को बुलाया जाए। जो कि अनुभवी हैं।
करौंदी गांव में बीती रात बाघ की दहाड़ और सुबह खेतों में मिले बाघ के पगचिह्नों से पूरे इलाके में ग्रामीणों और किसानों में भय का माहौल है।