
सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लामबंद हुए पिपरियावासी, पंचों को गांव में नहीं घुसने दिया
फरार थे 17 मेंबर, ग्रामीण नाराज
दलालों से नाराज है ग्रामवासी, पुलिस ने नहीं की कार्यवाही

बजाग / डिण्डौरी।ग्राम पंचायत पिपरिया माल जनपद बजाग़ में मंगलवार को सरपंच के अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना तय था। चर्चा थी कि बाहरी लोगों के हस्तक्षेप के चलते गांव के 17 पंच कई दिनों से गायब थे। आज मतदान करने जब पंचों को कारों से भेजा गया तो गांव के लोगों ने रास्ते में ही इन कारों को रोक कर पंचों से सवाल जवाब किया और गांव के लोगों की जमीनें हड़पने वालों का साथ देने के कारण नाराज गांव के लोगों ने उनके साथ मारपीट तक की, ग्रामवासियों का आक्रोश देखकर कई पंचों ने दौड़ लगा दी और वीडियो में उन्हें भागते हुए देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस से संबंधित कुछ लोगों ने बजाग थाने में जाकर मामले की शिकायत करने का प्रयास किया जिनके पास कुछ मेंबर भी है। उनका आरोप है भाजपा के सरपंच द्वारा गुंडागर्दी करवाई जा रही है। जबकि इस पूरे मामले में इनके साथ जमीन की दलाली के आरोप जिन पर लग रहे है वे भी देखे गए। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत पिपरिया माल की सरपंच को हटाने में बजाग के कुछ नव धनाढ्य और छुटभैया नेताओं की ज्यादा रुचि है। जिनके द्वारा गाड़ियों की व्यवस्था कर गांव के पंचों को गांव से दूर पंद्रह बीस दिनों से घुमाया जा रहा था। यही कथित लोग इनके रहने, खाने और खर्चे की व्यवस्था कर रहे थे। किंतु गांव के ज्यादातर लोग इन पंचों की हरकत से नाराज है और उन्होंने विश्वास मत पर मतदान के दौरान इनका जमकर विरोध किया गांव का रास्ता रोककर इन्हें गांव में नहीं घुसने दिया गया।

ग्रामीणों के आक्रोश से घबराए कथित दलाल
कथित दलाल, माफिया और छुटभैया नेताओं की साजिश पूरी होने के पहले जब ग्रामीणों का आक्रोश फूटा और गांव की महिला, पुरुष, नौजवानों ने फरार मेंबरों को रोक लिया तब गांव के बाहर से बड़ी बड़ी कारों में आए कथित तत्व भी डरकर भाग खड़े हुए और शेष बचे मेंबरों के साथ उन्होंने पुलिस थाना बजाग की शरण ली। इनका आरोप है कि सरपंच के इशारे पर लोगों ने तांडव किया जबकि ग्रामीणों का आक्रोश बाहरी लोगों की हरकत के खिलाफ दिखा।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत पिपरिया माल में बॉक्साइट खदान का ग्रामीण विरोध कर रहे है और सरपंच उनके साथ है। इस बात से नाराज माफियाओं के गुर्गे जिनका गांव और पंचायत से कोई वास्ता नहीं है, 17 पंचों को 15 दिनों से गांव से बरगलाकर बाहर ले गए थे। उन्हें सरपंच के खिलाफ मत देने के लिए प्रलोभन दिए जाने और गायब किए जाने की चर्चा के बीच आज जब कारों का काफिला इनको लेकर गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने इन पर हमला कर दिया जिससे कई पंच भाग खड़े हुए जनता ने उन्हें जमकर खदेड़ा। कुछ पंचों के परिवारजन उन्हें बचाकर घर ले गए उनको मतदान में शामिल नहीं होने भी नहीं जाने दिया। परिजन ग्रामीणों के आक्रोश को देखकर डरे हुए थे। इस बीच जानकारी आ रही है कि सरपंच के खिलाफ अविश्वास की कार्यवाही में उन्हें जीत मिल गई है और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया है। 17 पंच अब तक कहा गायब थे उन्हें कौन लेकर गया था वो जिन कारों से लाए जा रहे थे इस पर भी पुलिस को जांच करनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। पंचों की शिकायत पर मारपीट करने वालों पर भी कार्यवाही की जानी चाहिए। ग्रामीणों के आक्रोश और सरपंच की जीत ने ग्रामवासियों की एकजुटता के आगे माफियाओं को एक बार फिर भागने पर मजबूर कर दिया है। किंतु पिपरिया माल की स्थिति पर पुलिस और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए और सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाना चाहिए। पिछले दिनों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बजाग़ थाने में भू माफियाओं के दलालों की नामजद शिकायत की थी किंतु पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं किए जाने से वे अभी तक पंचायत में हस्तक्षेप कर रहे है जिससे टकराव की स्थिति बनी हुई है। कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती है जिसको लेकर प्रशासन को गंभीर रहना चाहिए और समय रहते उचित कार्यवाही की जाना चाहिए, बाहरी तत्वों पर गांव में गड़बड़ी करवाने पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए। सभी पंचों से प्रशासन को व्यक्तिगत रूप से घटना की जानकारी लेकर, वे किसके कहने पर गायब थे पूरी जानकारी लेकर कार्यवाही करनी चाहिए। उनका मत जानकर यदि वे सरपंच के विरोध में हो तो फिर से मौका दिया जाए ।
